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भारतीय राजव्यवस्था एवं अभिशासन “संविधान की प्रमुख विशेषतायें”

भारतीय राजव्यवस्था एवं अभिशासन

संविधान की प्रमुख विशेषतायें

प्रस्तावना
यह बात ध्यान देने योग्य है कि सन 1949 में अपनाए गए संविधान के अनेक वास्तविक लक्षणों में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। विशेष रूप से 7वें, 42वे, 44वें, 73वें व 74वें संशोधन में|
विभिन्न स्रोतों से विहित
संविधान का अधिकांश ढांचागत हिस्सा भारत शासन अधिनियम, 1935 से लिया गया है। संविधान का दार्शनिक भाग (मौलिक अधिकार और राज्य के नीति-निदेशक सिद्धान्त) क्रमशः अमेरिका और आयरलैंड से प्रेरित हैं। भारतीय संविधान के राजनीतिक भाग (संघीय सरकार का सिद्धांत और कार्यपालिका और विधायिका के संबंध) का अधिकांश हिस्सा ब्रिटेन के संविधान से लिया गया है।
संविधान के अन्य प्रावधान कनाडा, आॅस्ट्रेलिया, जर्मनी, यूएसएसआर (अब रूस), फ्रांस, दक्षिण अफ्रीका, जापान इत्यादि देशों के संविधानों से लिए गए हैं ।
नम्यता एवं अनम्यता का समन्वय
(अ). कुछ उपबंधों को संसद में विशेष बहुमत से संशोधित किया जा सकता है। उदाहरणार्थ, दोनों सदनों में उपस्थित और मतदान में भाग लेने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत और प्रत्येक सदन में कुल सदस्यों का बहुमत (जो कि 50 प्रतिशत से अधिक है)।
(ब). कुछ अन्य प्रावधानों को संसद के विशेष बहुमत और कुल राज्यों के आधे से अधिक राज्यों के अनुमोदन से ही संशोधित किया जा सकता है ।
इसके अलावा संविधान के कुछ प्रावधान आम विधायी प्रक्रिया की तरह संसद में सामान्य बहुमत के माध्यम से संशोधित किए जा सकते हैं। उल्लेखनीय है कि ये संशोधन अनुच्छेद 368 के अंतर्गत नहीं आते।
सरकार का संसदीय रूप
भारतीय संविधान ने अमेरिका की अध्यक्षीय प्रणाली की बजाए ब्रिटेन के संसदीय तंत्र को अपनाया है। संसदीय व्यवस्था विधायिका और कार्यपालिका के मध्य समन्वय व सहयोग के सिद्धांत पर आधारित है, जबकि अध्यक्षीय प्रणाली दोनों के बीच शक्तियों के विभाजन के सिद्धांत पर आधारित है ।
एकीकृत व स्वतंत्र न्यायपालिका
भारतीय संविधान एक ऐसी न्यायपालिका की स्थापना करता है, जो अपने आप में एकीकृत होने के साथ-साथ स्वतंत्र है। भारत की न्याय व्यवस्था में सर्वोच्च न्यायालय शीर्ष पर है। इसके नीचे राज्य स्तर पर उच्च न्यायालय हैं। राज्यों में उच्च न्यायालय के नीचे क्रमवार अधीनस्थ न्यायालय हैं, जैसे-जिला अदालत व अन्य निचली अदालतें।
मौलिक अधिकार
संविधान के तीसरे भाग में छह मौलिक अधिकारों का वर्णन किया गया है। ये अधिकार हैं:
  1. समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14- 18) ।
  2. स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19-22) ।
  3. शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23-24) ।
  4. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25-28) ।
  5. सांस्कृतिक व शिक्षा का अधिकार (अनुच्छेद 29 – 30) ।
  6. संवैधानिक उपचारों का अधिकार (अनुच्छेद 32) ।
राज्य के नीति-निदेशक सिद्धांत
डाॅ. बी. आर. अंबेडकर के अनुसार, राज्य के नीति-निदेशक सिद्धांत भारतीय संविधान की अनूठी विशेषता है। इनका उल्लेख संविधान के चौथे  भाग में किया गया है। इन्हें मोटे तौर पर तीन वर्गों में विभाजित किया जा सकता है-सामाजिक, गांधीवादी तथा उदार- बौद्धिक ।
मौलिक कर्तव्य
मूल संविधान में मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख नहीं किया गया है। इन्हें स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश के आधार पर 1976 के 42वें संविधान संशोधन के माध्यम से आंतरिक आपातकाल (1975 – 77) के दौरान शामिल किया गया था। 2002 के 86वें संविधान संशोधन ने एक और मौलिक कर्तव्य को जोड़ा ।
सार्वभौम वयस्क मताधिकार
भारतीय संविधान द्वारा राज्य विधानसभाओं और लोकसभा के चुनाव के आधारस्वरूप सार्वभौम व्यस्क मताधिकार को अपनाया गया है। हर वह व्यक्ति जिसकी उम्र कम से कम 18 वर्ष है, उसे धर्म, जाति, लिंग, साक्षरता अथवा संपदा इत्यादि के आधार पर कोई भेदभाव किए बिना मतदान करने का अधिकार है।
एकल नागरिकता
यद्यपि भारतीय संविधान फेडरल है और दो लक्षणों (एकल व संघीय) का प्रतिनिधित्व करता है मगर इसमें केवल एकल नागरिकता का प्रावधान है अर्थात भारतीय नागरिकता ।
आपातकालीन प्रावधान
इन प्रावधानों को संविधान में शामिल करने का उद्देश्य है- देश की संप्रभुता, एकता, अखण्डता और सुरक्षा, संविधान एवं देश के लोकतांत्रिक ढांचे को सुरक्षा प्रदान करना। संविधान में तीन प्रकार के आपातकाल की विवेचना की गई हैः
  1. राष्ट्रीय आपातकाल युद्ध, आक्रमण अथवा सशस्व विद्रोह पैदा हुई राष्ट्रीय अशांति की अवस्था (अनुच्छेद- 352) ।
  2. राज्य में आपातकाल: (राष्ट्रपति शासन ), राज्यों में संवैधानिक तंत्र की असफलता (अनुच्छेद 356) या केन्द्र के निदेशों का अनुपालन करने में असफलता (अनुच्छेद 365) ।
  3. वित्तीय आपातकालः भारत की वित्तीय स्थिरता या प्रत्यय संकट में हो । (अनुच्छेद 360) आपातकाल के दौरान देश की पूरी सत्ता केंद्र सरकार के हाथों में आ जाती है और राज्य केंद्र के नियंत्रण में चले जाते हैं।
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